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भामाशाह सुनील पुरोहित

पिता का नाम :

माता का नाम :

गाँव : दौलपुरा

जालोर । रानीवाड़ा पंचायत समिति का छोटा सा गांव दौलपुरा, जहां के बच्चों को उच्च शिक्षा दिलवाने के लिए गांव के ही भामाशाह सुनील पुरोहित ने करीब 70 लाख की लागत से डेढ़ बीघा जमीन पर भवन निर्माण करवाकर शिक्षा विभाग को सुपुर्द किया है। आगामी शैक्षणिक सत्र में अब गांव के बच्चों को गांव में ही पढ़ाई के लिए अनुकूल माहौल मिलेगा। भामाशाह पुरोहित का कहना है कि गांव में पहले 5वीं तक ही स्कूल होने से उन्हें पढ़ाई के लिए पास के गांवों में बने स्कूल में जाना पड़ा, लेकिन अब उनके बच्चे 8वीं तक की पढ़ाई गांव में ही कर सकेंगे। गौरतलब है कि भामाशाह के प्रयासों से ही 2011 में स्कूल आठवीं तक क्रमोन्नत हुआ है। करीब 40 साल पुराना स्कूल भवन जर्जरहाल होने के कारण भामाशाह ने गांव के बच्चों की सुविधा के लिए पिछले साल 10 कमरों वाले दो मंजिला भवन का निर्माण करवाकर 25 अप्रैल 2016 को शिक्षा विभाग को सुपुर्द किया गया है।
भामाशाह आगे आएं तो विभाग भी हर संभव मदद को तैयार
दौलपुरा में स्कूल भवन का निर्माण करवाने वाले भामाशाह सुनील पुरोहित का नाम सम्मान के लिए जयपुर भिजवाया गया था, जिनका 28 जून को भामाशाह जयंती पर होने वाले कार्यक्रम में सम्मानित किया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए भामाशाह आगे आएं तो विभाग की ओर से भी वहां हरसंभव सुविधा दिलवाने के पूरे प्रयास किए जाएंगे। -मुकेश सोलंकी, डीईओ, प्रारंभिक, जालोर
सरकार स्वास्थ्य केंद्र की अनुमति दे तो उसके बनाने केलीए भी तैयार है
पांच भाई बहनों में सबसे छोटे सुनील पुरोहित चिकित्सा सुविधाएं दिलवाने के लिए गांव में ही स्वास्थ्य केंद्र भी खुलवाना की मंशा रखते हैं। उन्होंने बताया कि सरकार यदि उनके गांव में स्वास्थ्य केंद्र खोलने की अनुमति देती है तो वह इसके लिए भवन निर्माण करवाकर सरकार को सुपुर्द करने को तैयार है ताकि गांव में ही लोगों को चिकित्सा सुविधाए बेहतर मिल सके। उन्होंने बताया कि सम्मान समारोह के दौरान वह सरकार के समक्ष इसके लिए आग्रह करेंगे।
भामाशाह दिवस पर होगा सम्मान
28 जून को भामाशाह जयंती पर सुबह 11 बजे बिडला ऑडिटोरियम, स्टेच्यू सर्किल, जयपुर में होने वाले राज्य स्तरीय समारोह में भामाशाह सुनील पुरोहित का सम्मान किया जाएगा। 18 जून को प्रारंभिक शिक्षा राजस्थान बीकानेर के निदेशक जगदीशचंद्र पुरोहित की ओर से भामाशाह पुरोहित को आमंत्रण पत्र भेजा गया है।
सुविधाओं के अभाव में छूटे किसी भी बच्चे की पढ़ाई : पुरोहित
भामाशाह सुनील पुरोहित ने बताया कि उनके समय में गांव में पांचवीं तक ही स्कूल होने के कारण उन्हें छठी सातवीं की पढ़ाई 2 किलोमीटर दूर मालवाड़ा स्थित स्कूल में जाकर पढ़ाई करनी पड़ी। कई बार गांव में ही उच्च शिक्षा की सुविधा नहीं होने से गांव के लोग अपने बच्चों को अन्यत्र भेजने से डरते हैं। पुरोहित ने बताया कि सातवीं के बाद वह व्यवसाय के लिए बंगलौर चले गए जहां उन्होंने पढ़ाई के साथ 2001 से 2003 तक तीन साल तक प्राइवेट नौकरी की।
फिर उन्होंने आईटी कोयले में इंपोर्ट-एक्सपोर्ट का काम शुरु किया। 2007 में कंस्ट्रक्शन का काम शुरु करने के साथ उन्होंने बीए की पढ़ाई भी पूरी की। यहां उन्हें अहसास हुआ कि तकनीक के इस युग में उनके गांव के बच्चे प्राइमरी शिक्षा तक पूरी नहीं कर पा रहे हैं। इस पर उन्होंने गांव में शिक्षा की सुविधा में विस्तार के लिए कुछ करने की ठानी। ऐसे में पहले उन्होंने 2011 में प्राइमरी स्कूल को मिडल तक क्रमोन्नत करवाने के लिए प्रयास किए। बाद में भवन की जर्जर हाल स्थिति को देखते हुए उन्होंने अपनी माता-पिता तारी देवी दलाजी के नाम से स्कूल भवन का निर्माण करवाया। पुरोहित का मानना है कि सुविधाओं के अभाव में उनके गांव का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित नहीं रहना चाहिए।

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