पिण्डिया

ये भी राजगुरु ही है | जनश्रुतियो के आधार पर इनके वंशज किसी को हरिद्वार में अस्थिया प्रवेश करने आये तब ये स्वयं विद्वान व ज्योतिष व कर्मकाण्ड के ज्ञाता थे | सयोंगवश वहां से पण्डा उपलब्ध नही हुआ होगा तब पिण्ड सिराते है व एक भाई से मन्त्रोच्चारण सहित पूर्ण विधि विधान के तहत पिण्ड सराये, उनका जो वंश चला वे पिण्डिया कहलाये | वर्तमान में इनका बड़ा गाव लुणावास जोधपुर जिले में आया हुआ है | अपने आपको पिण्डिया ही कहते है | बुजुर्गो को तो आज भी पता है की वे राजगुरु है | परन्तु भावी पिण्डिया ही कहती है | इस जाति / गौत्र का इतिहास / विवरण अगर आपके पास हो तो कृपया हमें 9782288336 नंबर पर व्हाट्स अप्प कर सकते है | धन्यवाद्

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