संखवालचा

साखवकालिया - जिस प्रकार जोशी हल्सिया हो गये ठीक उसी प्रकार शंखवाली ग्राम से कुछ परिवार अन्यत्र जाकर बसे एवं व्यास भूल गए शंखवालीको पीछे सखवालचा हो गए परंतु गौत्र ऋषि शाडिल्य महर्षि है । बुजुर्गों तक ही जानकारी रही है । युवाओं को नहीं )
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