फांदर

फादर - जनश्रुतियों , बुजुर्गों , रायों , ताम्रपत्रों व शिलोलेखों के आधार पर श्री कोदराजी ( पोजराज ) उदेश ने नोहर बादला के पास एक गांव बसाया था । बड़े ! ही गुरवीर व धार्मिक प्रवृति के थे । जहां इनका गांव था यहां मकानों की नीयो । अवशेष व इनकी कुलदेवी का स्थान आज भी मौजुद हैं । शासकों की अनीति के कारण इन्होंने पहले तो समझाने की कोशिश की परन्त कहते हैं बाद में भीषण युद्ध हुआ , उसमें कोदराज को वशज में कई शूरवीर काम आये , सतीये हुई ए शाप देकर गांव छोड दिया । कोदराजजी उदेश के पीछे जो वश चला वे सभी फादर कहलाऐ । इनके द्वारा बनाई बावड़ी आज भी विद्यमान हैं । इनकी कुलदेवी ह्माणी माता के पास चामुण्डा देवी की प्रतिमाएं भी थी
कुलदेवी को पास में चट्टान पर स्थापित किया गया है । वर्तमान में मूर्तिया खण्डित हैं । जा आज भी फादर परिवार नमन करने पहुंचते हैं परन्तु पानी नही पीते हैं , पानी साथ में लेकर आते हैं जो इस बात की पुष्टि करता हैं । कि फोदराजजी का ही ग्राम है व कुल देवी फादर गौत्र की ही होनी चाहिये । ( आगे हम फादर गौत्र के गांवो का उल्लेख करेगे । ) वर्तमान में एक यहा की महन्त है जिनकी 75 वर्ष की उस हैं । इनके द्वार अवगत कराया गया कि यहा साल में एक बार जिस दिन फोदरराजजी ने गाय दीखता कुछ नहीं । यहां वर्तमान में मीणा जाति व देवासी ( राईका ) ज्यादा है । हमारे ब्रमण काल में भी फादर बुजुर्गों द्वारा जानकारी यही मिली कि हम नोहर बादला से आये परन्तु ये कहीं आया हुआ हैं इन्हें पता नहीं । सिरोही जिले के प समिति शिवगज में आया हुआ है ) जिसकी वर्तमान में काना फोलर से जाना जाता हैं । उपरोक्त बातों की रिकोडिंग की गई है । वह संकलनकर्ता को पास व्यवस्थित हैं
इस जाति / गौत्र का इतिहास / विवरण हमारे पास उपलब्ध नही हैं | अगर आपके पास हो तो कृपया हमें 9782288336 नंबर पर व्हाट्स अप्प करें | धन्यवाद्

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