दूधा

ये श्रीमाली बराहमणों में से निकले हैं इनका बडेरा केसर जी श्रीमाली का बेटा दूधाजी चितोड़ के राणा मोकलजी ने उन्हे गैर इलाको से घोडे खरीद कर लाने के लिए बाहर भेज दिया था। घोडे खरीदने पर अपनी नियुक्ति स्वीकार करने के अपराध में मारवाड़ ब्राहमणों ने उन्हे जाति च्युत कर दिया और ये सब रिष्तेदारो सहित पिरोयतो में मिल गये। इस खां में कोई बड़ा शासन गांव नहीं है इनकी मुख्य खांपे 17 है।

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