सिद्धप

सिद्धपुर में कुछ समय रहने के पश्चात पुनः दूसरी जगह जाकर बसने के फलस्वरूप ही राजगुरु छोड़ सिद्धपुरीया कहलाने लगे धीरे - धीरे राजगुरु को भूलकर सिन्धप याद रहा व राजगुरु भूल गये | ( जेसे राजगुरु सनवाडा गाव के सणपरा हुए आमेट से आमेटा अजारी से अजारिया इत्यादी ) सिद्धपुर से ही सिंधप ; ऐसा ऐतिहासिक तथ्यों द्वारा ही प्रमाणित होता है | जिसे सिंधप के बुजुर्ग भी स्वीकार करते है की सिद्धपुर एवं अणकोल आकर बसे और वहां से अलग - अलग जाकर बसे | परंतु कही ऋसी एक होते हुए भी विभेद मानते है | इस जाति / गौत्र का इतिहास / विवरण अगर आपके पास हो तो कृपया हमें 9782288336 नंबर पर व्हाट्स अप्प कर सकते है | धन्यवाद्

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