मुथा

गुन्देषा व मुथा जाति की कुलदेवी रोहीणी माता ये पालीवाल ब्राह्मणों में से निकले है जब पाली मुसलमानों के हाथों से बिगड़ी तो इनके बडेरे पिरोयतों के साथ सगपण करके उनके साथ सामिल हुए इनकी खांपे 1. गुन्देषा 2. मुथा 3. चरख 4. गोटा 5. साथवा 6. नंनबाणा 7. नाणावाल 8. आगसेरिया 9. गोमतवाल 10. पोकरना 11. थाणक 12. बलवचा 13. बालचा 14. मोड 15. भगोरा 16. करमाणा 17. धमाणिया ये सिसोदियाॅ के पिरोयत है क््योंकि परगने गोडवाड़ में अक्सर गांव उदयपुर के महाराणा साहिब के बुजरगों के दिये हुए इनके पास हैं जिनमें गूंदेचा, मूंथो और बलवचों के पास तो एकजाई गांव बड़े-बड़े उपजाऊ के है। जिनमें गूंदेचा के पास मादा, बाडवा और निमबाडा, मूथों के पास पिलोवणी, घेनडी, भणदार, रूंगडी और षिवतलाब तथा बलवसों के पास पराखिया व पूराड़ा है। इस शासन गांवों के बाबत एक अजीब बात सुनने में आई है किराणा मोकलजी सिरोही से शादी करके चितौड़ जाते वक्त जब गोडवाड़ पहुंचे तो इन गांवों में से होकर गुजरे और गोडवाड़ का परगना सिरोही के इलाके और पश्चमि मेवाड़ से जयादा आबाद है जहां बारों महिनों खेतों में पानी की नहरे जारी रहती है जिनसे खेत हमेशा हरे भरे दिखाई देते है और कोयले दरखतों पर कूका करती है और ये सब सामान मुसाफिर के लिए जो मारवाड़ ऊजड़ और बनजर रेगिसतान से गोडवाड़ में आवे या मेवाड़ और सिरोही के खुषक पहाडों से वहां गुजरे बहुत कुछ मोहित और परफुललित होने का हेतु होता है। देवडी रानी जिनसे अपने बाप के राज में कभी यह बहार और शोभा नहीं देखी थी, इन गांवों की तर और ताजा हालत देखकर बहुत खुष हुई और वे दस पांच दिन उसके बहुत खुषी और दिललगी में गुजरे मगर जब गोडवाड के आगे मेवाड़ की पहाड़ी सरहद में सफर शुर् हुआ और वह शोभा फिर देखने में नहीं आई तो एक दिन उसने बड़े पछतावे के साथ राणाजी से कहा कि पिछे गांव तो बहुत अच्छे आये थे। अफसोस हे कि वे सब पीछे रह गये। राणाजी ने जबाब दिया कि जो मरजी हो तो उनको साथ लिजीये। राणाजी ने उसी वक्त पिरोयतों को बुला कर वे सब गांव संकलप कर दिये और रानी से कहा कि अब ये गांव इस लोक और परलोक में हमारे तुमहारे साथ रहेगे।

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