बाकलिया

लोपल , लाफा ,बाकलियां - ये तीनो मूल में जोशी ही है । जनप्रतियों के आधार पर एवं राव समाज पुष्टि के आधार इनके पूर्वज बडे प्रभावशाली थे रह उनकी समाज के गणमान्य पंचों में गणना होती थी । ( इनके नाम के बारे नाना तरह की भान्तियाँ हैं । इसलिए नाम लिखना उचित नहीं समझा ) एक समय वर्षा नहीं हुई जीविकोपार्जन का मुख्य व्यवसाय खेती था । चारा व अनाज के अभाव में पशुओं व मनुष्यों के हालात दयनीय स्थिति में पहुंच गये । आवागमन के साधन नहीं थे । ऐसे विकट समय में इन उपरोक्त गणमान्य पंच की धर्मपत्नि का स्वर्गवास हो गया । इनके चार पुत्र थे और चारों अलग अलग रहते थे । ( ज्येष्ठ पुत्र के सन्तान नहीं थी । उस समय समाज का वातलाना तथा खर्चा करना नितांत आवश्यक माना जाता था । उस जमाने में समृद्धिशाली परिवार के रूप में गणना जिस परिवार की हो तो उसे अपनी प्रतिष्ठा के आधार पर खचर्चा करना ही पड़ता था । प्रकृति का प्रकोप ने अच्छे - अच्छे परिवारों को हिलाकर रख दिया था । फिर भी इन महाशय ने चारों पुत्रों को इकट्ठा कर कहा कि क्या किया जाय ? तुम्हारी माता का खया कैसे किया जाय ? तो पुत्रों ने पिता से कहा कि जो कार्य भार आप हमें सौंपेंगे हम उसे
पूरा करेंगे । पिता ने सबसे ज्येष्ठ पुत्र को जिसके सन्तान नही थी । उससे कहा कि जो मेहमान आये उन सभी की व्यवस्था का जिम्मा विदाई तक तुम्हारा रहेगा । दूसरे पुत्र को कहा कि दूर दराज से ऊटों घोडों , बैलगाडियों पर मेहमान आएं उनके सभी पशुओं के चारे की व्यवस्था अपनी अपनी सामर्थता के अनुसार | तुम्हारी रहेगी । तीसरे पुत्र को तीसरे दिन प्राणी के पीछे गुगरी ( अनाज पका हुआ ) शोक प्रकट करने के फलस्वरूप मुट्ठी भरते थे । उसका कार्यभार सौंपा । चौथे पुत्र सबसे छोटे पुत्र ) जिसकी आर्थिक स्थिति अच्छी थी उससे कहा कि लापसी की व्यवस्था | तुम करोगे । इस प्रकार सभी कार्य को सुन्दर ढंग से व्यवस्थित करने के बाद ज्येष्ठ पुत्र ! का तो वंश चला ही नहीं । दूसरे पुत्र का जो वश चला । जिसने सभी पशुओं की चारे की व्यवस्था की उस घास का नाम लोपल था । उसी नाम से उनके वंशज कहलाये व कालान्तर में लोपल जाति हो गई , परन्तु मूल में जोशी ही है । तीसरे ने जो गुंगरी ( बाकला ) की मुट्ठी भरवाई थी उनका जो वंश चला वे बाकलिया कहलाये । जिसने लापसी बनाई वे लाफा कहलाये । परन्तु मूल में तीनों जोशी ही थे व है । कार्य करने के पीछे नामकरण हुआ , इनके बडे - बडे गांवों में बुर्जुगों के पास यह जानकारी है । युवाओं में नहीं है ।
इस जाति / गौत्र का इतिहास / विवरण हमारे पास उपलब्ध नही हैं | अगर आपके पास हो तो कृपया हमें 9782288336 नंबर पर व्हाट्स अप्प करें | धन्यवाद्

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