बोया

बुजुर्गों द्वारा मिली जानकारी के अनुसार कि - हमारे पूर्वज में आये हैं कि हम मूल में उदेश है हमारे पूर्वज हमारे बढेरों के फुल लेकर गयाजी गा , वापस आकर राजपुरोहित समाज को आमंतित्र कर अभूतभूर्व खर्चा किया । जिस का उदेश कहलाने लगे । धीरे - धी जान उदेश परिवार कुछ समय तक गयाजी वाले होते - होते उदेश हट गया एवं गयाजी वाले फिर गयाजी , गैयाल एवं वर्तमान में पैदा कहते हैं । हमारा दुर्भाग्य है कि हमारी पीढी के नवयुवक हमारे कहने के बावजूद भी दो नही कहकर गैवाल ही कहते हैं । लेकिन गैवाल तो गयाजी गये इसलिए कहला मूल है उर्देश ही हैं ।
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