सांचोरा

जालोरा जिले की सबसे बड़ी पंचायत समिति सांचोर में कुछ परिवार बस गये वे सांचोरा कहलाये परन्तु वर्तमान में सभी राजगुरु ही कहते है | यहा पर भी इनका एक सासण गाव आमली है व यहा के राजगुरुओ की शोर्य गाथाओ की जैसलमेर गढ के भाटी सिरदारो ने भी मुक्त कंठ से प्रसंशा की | वहां की लोकिक भाषा में जनश्रुतियो के आधार पर - थावर थारी आमली जाने जैसलमेर ! पागडीयो भवरा पड़े जाजा जाजा घेर !! भाटी सिरदारो की कन्या को लुटेरे उठाकर ले गये तब आमली गाव के पास से गुजर रहे थे | तब इस कन्या की पुकार सुनकर उन लुटेरों के साथ लड़ाई की जिसमे कई राजगुरु काम आये और उस कन्या को अपनी पुत्री की तरह रखकर समाचार जैसलमेर भेजा, जब भाटी सिरदारो ने राजपुरोहित जी के एहसान के बदले में कुछ भेंट देने का प्रस्ताव रखा जिसको अपनी समर्थता के आधार हुए जिस तरह एक पुत्री को विदा किया तब भाटी सिरदारो ने बड़े ही क्रतज्ञता पूर्वक सजलनेत्रो से भाव विहंल होकर उपरोक्त दोहा कहा | संशिप्त में जिसका उपरोक्त भाव दर्शाया गया परन्तु वर्तमान में सांचोर में आस पास गाव में बसे सभी अपने आपको राजगुरु ही कहते है | अगर आपके पास इस जाति / गौत्र का इतिहास / विवरण हो तो कृपया हमें 9782288336 नंबर पर व्हाट्स अप्प करें | धन्यवाद्

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