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PHALNA(फालना )

22 / 6 / 1970 को दो बिधा जमीन एवं 24 /3 /1971 को एक बिधा जमीन फलना में खरीद कर शिक्षा प्रेमियों ने छात्रावास निर्माण का वातावरण तेयार किया एवं निम्बेश्वर महादेव में छात्रावास निर्माण हेतु समाज के बन्धुओं को आमंत्रित कर एक कार्यकरणी बनाये गये जिसमे स्व रावत सिंह जी बंसत को अध्यक्ष एवं रुघनाथ सिंह जी (सिन्दरली) को उपा अध्यक्ष ओ श्री चुन्नीलाल जोशी को सचिव , बख्तावर सिंह बंसत को संयुक्त सचिव , श्री सबल सिंह जी शिवतालाव उप सचिव मनोनीत किया गया फलना छात्रावास में सर्वप्रथम आत्मानंद जी महाराज 501 रुपये दे कर शुरु आत की थी फिर इसमे त्यागी भामाशाहों , दानदाताओ एवं सहयोग करने वाले समाज प्रेमियों की सेवाओ रही हे , जिसमे श्री देवीशंकर व्यास (बोया), जिन्होंने छात्रावास में 12 कमरे का निर्माण करवाया था ,सच पूछा जाये तो विद्या दान से बड़ा कोई दन नहीं हैं । छात्रावास की सुविधाओं से पल्लवित बालक विद्या ग्रहण कर विद्वान , वकील , जज , प्रशासनिक सेवाओं के अधिकारी , व्यवसायी , उद्योगपति , दार्शनिक बनते हैं आज के में पढ़ाई का महत्व इससे आँका जा सकता हैं , कि बिना पढ़े छोटा सा धंधा करना भी मुश्किल हैं । समाज में शिक्षा का प्रसार ही समाज का अभ्युदय कर सकता हैं । शिक्षा केन्द्र स्थान जोधपुर में श्री राजगुरू पुरोहित छात्रावास की स्थापना की जा चुकी थी । अन्य जिला मुख्यालयों पर छात्रावास बनाने के लिये । समाज के बन्धुओं के प्रयास चल रहे थे । गौडवाड क्षेत्र में समाज के शिक्षा प्रेमियों ने समय - समय पर सम्मेलन व सभाएं आयोजित कर शैक्षिक विकास के लिये सजातिय बन्धुओं को प्रेरित किया । साथ - साथ छात्रावास नव निर्माण में अपनी सहमति जताते हुए कहा कि अतिशीघ्र कार्य को मूर्त रूप देने के लिये श्री गणेश किया जावे । तब सन् 1956 में सभी एकमत होकर छात्रावास भवन निर्माण के स्थान को उपयुक्त समझते हुए निर्णय लिया सन १96 में निम्बेश्वर महादेव के पावन स्थान पर समाज के उत्साही ( शिक्षा के प्रति युवाओं ने सजातीय सम्मेलन का आयोजन किया । इस आयोजन में धर्म प्रेमियों ने आग्रह किया कि पहले यहाँ एक समाज भवन होना नितांत आवश्यक हैं सभी की सहमति से छात्रावास से पूर्व निम्बेश्वर महादेव के धार्मिक स्थान पर एक ( समाज भवन ) धर्मशाला बनाने के कार्य को प्राथमिकता देकर समाज के भामाशाहों व दानदाताओं के सहयोग से अल्पकाल में ही भवन धर्मशाला ) बनकर तैयार हो गया । इस नवनिर्मित भवन ( धर्मशाला ) में की सभाएं व समाज सम्मेलन कार्यकत्र्ताओं हर सोमवार को मंदिर में दर्शनाथ दर्शन करने के बाद विश्राम करते रहते व की आवश्यकता पर विचार विमर्श भी समय - समय पर करते रहते । 2 - e - 70 को दो बीधा जमीन एवं 24 - 3 - 71 को एक बीघा जमीन का में खरीद कर ने शिक्षा प्रेमियों तैयार छात्रावास निर्माण का वातावरण किया निम्बेश्वर महादेव में पुनः छात्रावास भवन निर्माण हेतु क्षेत्रिय बन्धुओं को आमंईि । कर एक कार्यकारिणी गठित की गई . जिसमें स्व . रावतसिंहजी बसंत को अध्यक्ष , रूघनाथसिंहजी ( सिन्दरली ) को उपाध्यक्ष व श्री चुन्नीलालजी जोशी को सचिव बख्तावरसिंहजी ( भू पू सरपंच ) बसंत को संयुक्त सचिव श्री सबलसिंहजी शिवतलाना उप सविच मनोनित किया व बिना पद प्राप्त किये श्री नारायणसिंहजी मादा भीखसिंहजी मूरी के नेतृत्व में निर्माण कार्य को शुरू किया गया । श्री रावतसिंहजी बसंत व रूघनाथसिंहजी सिन्दरली ने भवन की नींव भरवाकर दरवाजों के चौखटे तैयार करवाये व हर परिवार से ग्यारह रूपये से कम भी प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया लेकिन अकारण संदेह व विचारों में मतभेद होने से कार्य में शिथिलता आ गई परन्तु उत्साही कार्यकर्ता निराश नहीं हुए । 2 - 3 वर्ष पश्चात बीजापुर के स्व . श्री बुद्धसिंहजी का सहयोग भी अविस्मरणीय रहा । इन्होने गांव - गांव जाकर चंदा इकट्ठा किया तथा नवनिर्माणाधीन छात्रावास में ही रहकर अपनी सराहनीय नि : स्वार्थ सेवाएं दी । संत श्री आत्मानंदजी ने 501 रू . से कर आशीर्वाद दिया । उसी के फलस्वरूप राजपुरोहित छात्रावास फालना बनकर तैयार हुआ । राजपुरोहित विकास संघ फालना संस्था को रजिस्टर्ड करवाया विधान बनाकर ) गया । विधान तहत ही समय - समय पर निष्पक्ष चुनाव होते हैं । समय - समय पर सभी पदाधिकारियों ने इस भवन के विकास में अहं भूमिकाएं अपने कार्यकाल में अदा कर इसके विकास में योगदान दिया । कई विषमताओं के दौर से गुजरकर ही इस भवन ने यह वर्तमान रूप लिया । इसमें कई त्यागी भामाशाहों दानदाताओं एवं रचनात्मक सहयोग करने वाले समाज प्रेमियों की सेवाएं समर्पित रही जिसमें श्री देवीशंकरजी व्यास ( बोया ) जिन्होने छात्रावास में 12 कमरों का निर्माण करवाया , भी उल्लेखनीय हैं ।

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